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गौधाम योजना की शुरुआत, सीएम साय ने बिलासपुर में की गोमाता की पूजा, 25 एकड़ में बना विशाल गौधाम

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गौधाम योजना की शुरुआत, सीएम साय ने बिलासपुर में की गोमाता की पूजा, 25 एकड़ में बना विशाल गौधाम
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छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में गौधाम योजना छत्तीसगढ़ की शुरुआत कर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड के लाखासार गांव में इस योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोमाता की पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ती आवारा मवेशियों की समस्या को नियंत्रित करना और उन्हें सुरक्षित आश्रय प्रदान करना है। गौधाम योजना छत्तीसगढ़ के तहत बेसहारा पशुओं के लिए चारा, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की जाएगी ताकि पशुधन का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

बिलासपुर में 25 एकड़ में विकसित हुआ गौधाम

बिलासपुर जिले के लाखासार गांव में गौधाम योजना छत्तीसगढ़ के तहत लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में गौधाम विकसित किया गया है। इसमें से करीब 19 एकड़ भूमि पर पशुओं के लिए हरे चारे की खेती की जा रही है, जिससे गौधाम में रहने वाले पशुओं के लिए भोजन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री साय ने इस दौरान वहां रखे गए बेसहारा और आवारा पशुओं की देखभाल, चारा-पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और कहा कि इस प्रकार की योजनाएं राज्य में पशुधन संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

योजना का उद्देश्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गौधाम योजना छत्तीसगढ़ का मुख्य उद्देश्य बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना, गोधन संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति और कृषि व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इसलिए राज्य सरकार पशुधन संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस योजना के माध्यम से न केवल मवेशियों की सुरक्षा होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पशुपालन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी योजना

मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि गौधाम योजना छत्तीसगढ़ को राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थान मिलेगा और गौसेवा की परंपरा को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य के सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे, जिससे इस योजना को एक नई पहचान मिलेगी।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई पहल

दरअसल, छत्तीसगढ़ में सड़कों पर आवारा मवेशियों के कारण लगातार दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आ रही थीं। इस समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया था और राज्य सरकार के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद सरकार ने गौधाम योजना छत्तीसगढ़ को तेजी से लागू करने का निर्णय लिया। अब इस योजना के माध्यम से आवारा पशुओं की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ही पशुधन संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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